मेरे छूने से भी अब वो गलने लगे हैं
सुना है राहे-ए-वफ़ा पे वो चलने लगे हैं।
दिखाते थे जो ख्वाब सारी कायनात के
वो अब अपनी ही दुनिया में पलने लगे हैं।
झेली थी जिसने हर तपिश मेरे लिए
वो भी अब मुझसे ही जलने लगे हैं।
रहे हर जलवा तेरा सलामत यही दुआ है
हमारा क्या, हम भी अब खुद को ही खलने लगे हैं।

Waah sharma ji
ReplyDeleteShukriya pammi ji
Deleteछा गए गुरु।
ReplyDeleteThanks bhai
DeleteYe kavita bade bhai dwara likhi gai hai