कल रात मेने एक सपना देखा
सपने में कोई अपना देखा
ना देखा पहले कभी
ना ही कभी हूँ उस से मिला
फिर भी उस चेहरे में अपनों सा एहसास हुआ
सपने में कुछ यूँ बातें हुई
बातें शुरू इशारों से हुई
खामोश दोनों थे खड़े
फिर चेहरे पे मुस्कान हुई
वो वक़्त यूँ ही गुजर गया
ख़ामोशी में मैं कुछ बोल गया
जवाब भी मिला उनकी नजरों से
और मै सपने से सपने में खो गया
फिर कुछ ऐसी बात हुई
ख़ामोशी से बैठे-बैठे श्याम हुई
और वक़्त आया जुदाई का
वो अपने घर को रुक्सत हुई
जुदाई का असर मुझपर कुछ ऐसा हुआ
नींद से में जग गया
मुस्कुराया अपने सपने को यद् कर के
और सोचा काश कभी तो ये सच होगा

❤️Pyaar❤️
ReplyDeleteEk Dusre ka Khyaal Rakhna 😘
Ek Dusre ko Samaj Paana 😚
Ek Dusre ko Important Feel karna 💞💞
Bhaut Ladai karna😡😡
Fir bhi, 🙊
Ek Dusre k Bina Nahi ❌
Reh Paana 💑💏
❤️Pyaar❤️
ReplyDeleteEk Dusre ka Khyaal Rakhna 😘
Ek Dusre ko Samaj Paana 😚
Ek Dusre ko Important Feel karna 💞💞
Bhaut Ladai karna😡😡
Fir bhi, 🙊
Ek Dusre k Bina Nahi ❌
Reh Paana 💑💏
Ek no. 👌👌👌
ReplyDeleteShukriya
DeleteWah sharma ji✨��
ReplyDeleteThanks Pammi ji
DeleteWow chachu 👌🏼👇
ReplyDeleteShukriya
DeletewaaaaAaow
ReplyDeleteकविता बेहद उम्दा है आपकी,
ReplyDeleteशुरुआत बहुत अच्छी है ,
परंतु अंजाम आप और भी बेहतर बना सकते थे।
पढते पढते ना जाने एसी उम्मीद जग गयी थी।
Dhanyvad
Deletekuch toh hai aapki kalam ki syahi mai jo dil ki baate likh deti hai.
ReplyDeleteछा गये जनाब ����
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