शुरवात बातों से हुई
फिर कुछ मुलाकातें हुई
फिर हमें तुम्हारी फ़िक्र सताने लगी
और धीरे धीरे प्यार की शुरवात हुई
परेशां से फिरने लगे
जिस दिन बात तुमसे न हुई
नजरें तलाशने लगी तुमको
जिस दिन तुम दिखे नहीं
कुछ ऐसा हमारा हाल रहने लगा
और धीरे धीरे इकरार होने लगा
दिखने लगे आप हर जगह
होने लगी आपकी बातें ज्यादा
खुद की तो जैसे कोई जिंदगी है नहीं रही
कुछ इस तरह प्यार का सफर शुरू हो गया
धीरे धीरे ये एहसास होने लगा
तेरे बिना जीना मुश्किल है मेरा
जिन्दा हूँ पर जिन्दा नहीं
जिस पल तू मेरे पास नहीं
कुछ इस तरह मेरा हाल हो गया
धीरे धीरे प्यार का सफर शुरू हो गया

Gazab...
ReplyDeleteWell done👏👏👏
ReplyDeleteक्या बात, क्या बात, क्या बात।
ReplyDeleteगजब
ReplyDeletewah wah wah
ReplyDeletekeep it up
Wahh!! Sharma ji wahhh!!!
ReplyDeleteDil chhoo gaye hain aapke likhe alfaaz ��
Bahut khub bhai ji
ReplyDeleteGood keep it up
ReplyDeleteGood
ReplyDeleteHar ek pyaar krne wale ki jubani likh di sir aapne
ReplyDeleteWaah kya likha h jnaab
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