कल रात मेने एक सपना देखा सपने में कोई अपना देखा ना देखा पहले कभी ना ही कभी हूँ उस से मिला फिर भी उस चेहरे में अपनों सा एहसास हुआ सपने में कुछ यूँ बातें हुई बातें शुरू इशारों से हुई खामोश दोनों थे खड़े फिर चेहरे पे मुस्कान हुई वो वक़्त यूँ ही गुजर गया ख़ामोशी में मैं कुछ बोल गया जवाब भी मिला उनकी नजरों से और मै सपने से सपने में खो गया फिर कुछ ऐसी बात हुई ख़ामोशी से बैठे-बैठे श्याम हुई और वक़्त आया जुदाई का वो अपने घर को रुक्सत हुई जुदाई का असर मुझपर कुछ ऐसा हुआ नींद से में जग गया मुस्कुराया अपने सपने को यद् कर के और सोचा काश कभी तो ये सच होगा ...