आज तुम्हारी तारीफ में दो शब्द हो जाये ! तुम्हारी जुल्फें लहराती है जब तुम्हारी जुल्फें देख कंघी को भी शर्म आ जाये आज तुम्हारी तारीफ में दो शब्द हो जाये ! आईने के सामने जाते हो जब निहारते हो अपनी खूबसूरती को आईने के सामने जाते हो जब निहारते हो अपनी खूबसूरती को तुम्हरे चेहरे का नूर देख आइना भी घबरा के फुट जाये आज तुम्हारी तारीफ में दो शब्द हो जाये ! चलती हो कमर मटका के जब स्वर्ग की अप्सरा लगती हो चलती हो कमर मटका के जब स्वर्ग की अप्सरा लगती हो खा खा के फ़ैल गई हो इतना देखना कहीं मोच न आ जाये आज तुम्हारी तारीफ में दो शब्द हो जाये ! आँखों पे लगा काजल तुम्हारा कइयों का कतल कर देता है आँखों पे लगा काजल तुम्हारा कइयों का कतल कर देता है तुम्हारी इसी डरावनी अदा से देखो कहीं कोई डर के बेहोश न हो जाये आज तुम्हारी तारीफ में दो शब्द हो जाये !